रिश्तों के टूटने का असली कारण
आज रिश्तों के टूटने का सबसे बड़ा कारण है रिश्तों के महत्व को न समझ पाना और जिम्मेदारी से भागना। चाहे वह महिला हो या पुरुष, दोनों ही कहीं न कहीं इस गलती के भागीदार हैं। आज इंसान अनावश्यक चीजों की तरफ भाग रहा है। उसे खुद यह भी नहीं पता कि उसे वास्तव में चाहिए क्या। और सबसे बड़ी बात अहंकार इतना बढ़ चुका है कि वह सही ज्ञान लेना भी नहीं चाहता। भौतिक आकर्षण के आधार पर लोग शादी तो कर लेते हैं, लेकिन जब असली जीवन की सच्चाई सामने आती है, तो वही रिश्ता बोझ लगने लगता है।
फिर शुरू होता है
एक-दूसरे को दोष देना,
खुद को सही साबित करना,
और सामने वाले को नीचा दिखाना।
यहीं से रिश्ते टूटने लगते हैं।
आजकल रिश्तों की एक नई परिभाषा बना दी गई है
“क्यों किसी की सुनें?”,
“आज़ाद रहना चाहिए”,
“कम्प्रोमाइज़ क्यों करें?”
लेकिन सच्चाई यह है कि रिश्ता निभाने से पहले यह समझना जरूरी है कि रिश्ता होता क्या है। जब रिश्ते की नींव केवल भौतिक सुख या आकर्षण पर होती है, तो वह सुख खत्म होते ही रिश्ता भी खत्म होने लगता है। रिश्ता तभी चलता है, जब उसमें हो समझदारी, जिम्मेदारी, अहसास, प्रेम, दया, कर्तव्य, विश्वास और सत्य। अगर ये नहीं हैं, तो फिर लड़ाई, झगड़े और अलगाव होना तय है।
निष्कर्ष
रिश्ते बोझ नहीं होते,
वे हमारी समझ और जिम्मेदारी की परीक्षा होते हैं।

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