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गहरा विचार

प्रमाण न होना यह साबित नहीं करता कि कुछ हुआ ही नहीं, और सिर्फ विश्वास यह साबित नहीं करता कि सब कुछ वैसा ही हुआ जैसा कहा गया; सत्य इन दोनों के बीच में होता है, जहाँ समझ और विवेक काम करता है। आज जो हम जी रहे हैं, वही कल किसी के लिए इतिहास, किसी के लिए कहानी और किसी के लिए आस्था बन जाएगाअगर प्रमाण बचे तो इतिहास, न बचे तो कथा; इसलिए अतीत का सत्य कुछ इतिहास, कुछ अनुभव और कुछ प्रतीक होता है, और वर्तमान भी उसी प्रक्रिया से गुजर रहा है। ऐसे में जो लोग कथाओं पर विश्वास करते हैं, उन्हें तुरंत अंधविश्वासी कहना भी उतना ही गलत है जितना बिना समझ हर बात को सच मान लेना, क्योंकि प्रमाण का अभाव घटना के न होने का प्रमाण नहीं होता, और न ही यह जरूरी है कि जो कहा गया सब वैसा ही हुआ हो; जो बीत जाता है वह अक्सर कहानी और प्रतीक बन जाता है, इसलिए सत्य को केवल प्रमाण में नहीं, बल्कि समझ, संतुलन और विवेक में देखना ही सही दृष्टि है।

सत्य क्या है




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